छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल | interesting tourist places in chhattisgarh in hindi
छत्तीसगढ़ में ऐसी बहुत सी बाते है, जो भारत के अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ को खास बनाती है। छत्तीसगढ़ में बहुत सारे पर्यटन स्थल है। आइये जानते है छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल के बारे में - सी.जी ट्रिप
पर्यटन स्थल
सिरपुर
लक्ष्मण मंदिर
लक्ष्मण मंदिर लाल ईटो से बनाया गया है। जब इसे हर से देखा जाता है तो ये सामान्य मंदिर जेसा ही देता है,लेकिन इसकी वास्तुकला, निर्माण और इस मंदिर के बनने के पीछे की कहानी के कारण लक्ष्मण मंदिर को लाल ताज महल भी कहा जाता है।इसका तोरण 6'×6' है, जिस पर अनेक प्रकार की नक़्क़ाशी की गई हैं। मन्दिर के गर्भ गृह में लक्ष्मण की मूर्ति है जो 26"×16" है।गुप्तकालीन भित्ती गवाक्ष इस मन्दिर की वेशेषता है।
गंधेश्वर महादेव का मन्दिर
मैनपाट
नंदनवन जंगल सफारी
जंगल सफारी, सेक्टर -39 नया रायपुर में स्थित है। नया रायपुर में करीब 800 एकड़़ के क्षेत्र में 200 करोड़ रुपए की लागत से यह मानव निर्मित जंगल सफारी बनी है. इस में वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण मुहैया कराया गया है। छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में 797 एकड़ क्षेत्र में फैला जंगल सफारी एशिया का सबसे बड़ा मानवनिर्मित जंगल सफारी है । इसका उद्घाटन 1 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया।यह पर कई प्रजातियों के जंगली जानवर रहते है। नंदनवन को बेहद आकर्षित बनाया गया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। नया रायपुर,रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किमी और स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर से 15 किमी दूर है।
मैत्री पार्क
यह भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा संचालित एक चिड़ियाघर एवं बच्चों का पार्क है। यह हमारे छत्तीसगढ़ राज्य के भिलाई शहर में स्थित है। मैत्री पार्क छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा पार्क है। मैत्री पार्क में भिन्न भिन्न प्रकार के जानवर, चिड़िया, साप, सफेद बाघ चिड़ियाघर का मुख्य आकर्षण हैं। मैत्री बाग चिड़ियाघर के साथ-साथ एक पार्क भी है। इसे भिलाई स्टील प्लांट के द्वारा दो मानव निर्मित जलाशय के बगल में बनाया गया है। भिलाई वाटर वर्क मैत्री गाब के पास में ही है, जो पूरे शहर को पीने का साफ पानी मुहैया कराता है। पर्यटक यहां होने वाले म्यूजिकल फाउंटेन देखने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। साल में एक बार यहाँ फूलो का प्रदर्शन (flower show) होता है जहा पर तरह- तरह के फूल लाये जाते है।गंगरेल बांध
छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत धमतरी जिले में गंगरेल बांध स्थित है। इस बांध को "श्री रविशंकर शुक्ल " के नाम पर रखा गया है, क्योंकि इस बांध का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं अविभाजित म.प्र. के प्रथम मुख्यमंत्री श्री रवि शंकर शुल्क के नाम पर "रवि शंकर जलाशय" रखा गया है। इस बांध की स्थापना सन-1978 में की गयी थी। बांध निर्माण की घोषणा सन-1972 में की गयी थी। इस बांध का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी के द्वारा किया गया था। गंगरेल बांध महानदी के पार पर बनाया गया है गंगरेल बांध छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा बांध है। गंगरेल बांध बेहद खूबसूरत बनाया गया है, बांध में बहुत सारे मनोहर दृश्य देखने मिलते है। इस बांध को बनने में लगभग 6 साल का समय लग गया था।
चित्रकोट जलप्रपात
छत्तीसगढ़ में जगदलपुर जिले से 40 किलोमीटर की दुरी पर चित्रकोट जलप्रपात स्थित है। चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे खुबसूरत जलप्रपात है चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित है। चित्रकोट जलप्रपात की ऊंचाई 90 फीट है। बारिश के मौसम में चित्रकोट जलप्रपात रक्त लालिमा लिए होता है, तो ग्रीष्म ऋतू की रात में सफ़ेद रंग का दिखाई देता है। चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा , चौड़ा और ज्यादा मात्रा में जल प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है, बारिश के मौसम में इस जलप्रपात की चौड़ाई लगभग 150 मीटर होती है ।
डोंगरगढ़
डोंगरगढ़ एक धार्मिक पयर्टन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, डोंगरगढ़ में माँ बमलेश्वरी मंदिर की प्रतिष्ठा देश-विदेश तक है। माँ बमलेश्वरी मंदिर विशाल पर्वत पर स्थापित है। मंदिर में जाने के लिए पहाड़ो पर बनी 1000 से ज्यादा सीढिया चढ़नी पड़ती है। ये मंदिर बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है मंदिर के आस-पास बहुत ही मनोहर द्श्य देखने मिलता है। "डोंगर" का अर्थ "पहाड़" और "गढ़" का अर्थ "दुर्ग" होता है, अर्थात नगर के नाम का अर्थ "पहाड़ पर दुर्ग" है। डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य में राजनांदगांव जिले का एक शहर और नगर पालिका है तथा माँ बांम्बलेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है । राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी का इतिहास काफी पुराना है।
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान
छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है, ये उद्यान इंद्रावती नदी के पास होने के कारण इसका नाम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान पड़ा। इस उद्यान की स्थापना सन- 1978 में हुई इसका क्षेत्रफल 2799.08 वर्ग किलोमीटर है। राज्य सरकार द्वारा टाइगर रिजेर्व 2009 में लागु किया गया। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के बेहतरीन और सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव उद्यान हैं। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को कुटरू राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है। पार्क अपनी अनूठी और विविध वन्यजीव और पक्षी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे जंगली भैंसा और पहाड़ी पक्षी भी शामिल हैं।

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