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छत्तीसगढ़ के रोचक पर्यटन स्थल | interesting tourist places in chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल | interesting tourist places in chhattisgarh in hindi

छत्तीसगढ़ में ऐसी बहुत सी बाते है, जो भारत के अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ को खास बनाती है। छत्तीसगढ़ में बहुत सारे पर्यटन स्थल है। आइये जानते है छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल के बारे में - सी.जी ट्रिप 

पर्यटन स्थल 

  • सिरपुर
  • मैनपाट
  • नंदनवन जंगल सफारी 
  • मैत्री पार्क 
  • गंगरेल जलप्रपात
  • चित्रकोट जलप्रपात 
  • डोंगरगढ़  
  •  इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान
  •  भोरमदेव मंदिर
  •  रायपुर 
  • सिरपुर

    सिरपुर (Sirpur) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुन्द ज़िले की महासमुन्द तहसील में स्थित एक गाँव है। यह महानदी के किनारे बसा हुआ एक ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल है। यहाँ कई प्राचीन मंदिर हैं। सिरपुर या श्रीपुर या सीरपुर छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 78 किमी दूर महानदी के तट पर स्थित है। यहाँ पर कई एतेहासिक मंदिर है। 

    लक्ष्मण मंदिर 

    लक्ष्मण मंदिर लाल ईटो से बनाया गया है। जब इसे  हर से देखा जाता है तो ये सामान्य मंदिर जेसा ही देता है,लेकिन इसकी  वास्तुकला, निर्माण और इस मंदिर के बनने के पीछे की कहानी के कारण लक्ष्मण मंदिर को लाल ताज महल भी कहा जाता है।इसका तोरण 6'×6' है, जिस पर अनेक प्रकार की नक़्क़ाशी की गई हैं। मन्दिर के गर्भ गृह में लक्ष्मण की मूर्ति है जो 26"×16" है।गुप्तकालीन भित्ती गवाक्ष इस मन्दिर की वेशेषता है। 

    Lakshman mandir


    गंधेश्वर महादेव का मन्दिर

    सिरपुर का एक अन्य मन्दिर गंधेश्वर महादेव का है। जो महानदी के तट पर स्थित है।जैसा कि नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि गंधेश्‍वर मंदिर, इस क्षेत्र के कई खंडहर मंदिरों और विहारों का इस्‍तेमाल करके बना है। उसी कारण से, मंदिर की वास्‍तुकला और नक्‍काशी वाली संरचनाओं को देखने से मन खुश हो जाता है।यह मन्दिर वास्तव में सिरपुर के अवशेषों की सामग्री से ही बना प्रतीत होता है।

    मैनपाट

    मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है। मैनपाट छत्तीसगढ़ का एक हिल स्टेशन है। मैनपाट खूबसूरत वादियों से घिरा हुआ है। मैनपाट छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले (सरगुजा जिला) में स्थित है। मैंनपाट विन्ध पर्वत माला पर स्थित है जिसकी समुद्र सतह से ऊंचाई 3781 फीट है। मैनपाट से रिहंद और मांड नदी निकलती है। इन दो नदियों के बारे में बहुत सारे लोगों को जानकारी है। यहां पर और भी नदियां निकलती हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। इसे छत्तीसगढ का तिब्बत भी कहा जाता हैं। यहां तिब्बती लोगों का जीवन एवं बौध मंदिर आकर्षण का केन्द्र है। यहां पर एक सैनिक स्कूल भी प्रस्तावित है। यहां पानी का बहाव नीचे की तरफ न होकर ऊपर यानी ऊंचाई की तरफ है। यहां सड़क पर खड़ी न्यूट्रल गाड़ी 110 मीटर तक पहाड़ी की ओर चली जाती है। मैनपाट की इस जगह में गुरुत्वाकर्षण बल से ज्यादा प्रभावी मैग्नेटिक फील्ड है, जो पानी या वाहन को ऊपर की तरफ खींचता है। 
    mainpat


    नंदनवन जंगल सफारी 

    जंगल सफारी, सेक्टर -39 नया रायपुर में स्थित है। नया रायपुर में करीब 800 एकड़़ के क्षेत्र में 200 करोड़ रुपए की लागत से यह मानव निर्मित जंगल सफारी बनी है. इस में वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण मुहैया कराया गया है। छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में 797 एकड़ क्षेत्र में फैला जंगल सफारी एशिया का सबसे बड़ा मानवनिर्मित जंगल सफारी है । इसका उद्घाटन 1 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया।यह पर कई प्रजातियों के जंगली जानवर रहते है। नंदनवन को बेहद आकर्षित बनाया गया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। नया रायपुर,रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किमी और स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर से 15 किमी दूर है। 

    मैत्री पार्क

    यह भिलाई इस्‍पात संयंत्र द्वारा संचालित एक चिड़ियाघर एवं बच्चों का पार्क है। यह हमारे छत्तीसगढ़ राज्य के भिलाई शहर में स्थित है। मैत्री पार्क छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा पार्क है। मैत्री पार्क में भिन्न भिन्न प्रकार के जानवर, चिड़िया, साप, सफेद बाघ चिड़ियाघर का मुख्य आकर्षण हैं। मैत्री बाग चिड़ियाघर के साथ-साथ एक पार्क भी है। इसे भिलाई स्टील प्लांट के द्वारा दो मानव निर्मित जलाशय के बगल में बनाया गया है। भिलाई वाटर वर्क मैत्री गाब के पास में ही है, जो पूरे शहर को पीने का साफ पानी मुहैया कराता है। पर्यटक यहां होने वाले म्यूजिकल फाउंटेन देखने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। साल में एक बार यहाँ फूलो का प्रदर्शन (flower show) होता है जहा पर तरह- तरह के फूल लाये जाते है।
    matri park


    गंगरेल बांध 

    छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत धमतरी जिले में गंगरेल बांध स्थित है।  इस बांध को "श्री रविशंकर शुक्ल " के नाम पर रखा गया है, क्योंकि इस बांध का नामकरण स्वतंत्रता सेनानी एवं अविभाजित म.प्र. के प्रथम मुख्यमंत्री श्री रवि शंकर शुल्क के नाम पर "रवि शंकर जलाशय" रखा गया है।  इस बांध की स्थापना सन-1978 में की गयी थी। बांध निर्माण की घोषणा सन-1972 में की गयी थी। इस बांध का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी के द्वारा किया गया था। गंगरेल बांध महानदी के पार पर बनाया गया है गंगरेल बांध छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा बांध है। गंगरेल बांध बेहद खूबसूरत बनाया गया है, बांध में बहुत सारे मनोहर दृश्य देखने मिलते है। इस बांध को बनने में लगभग 6 साल का समय लग गया था। 

    gangrel


    चित्रकोट जलप्रपात 

    छत्तीसगढ़ में जगदलपुर जिले से 40 किलोमीटर की दुरी पर चित्रकोट जलप्रपात स्थित है। चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे खुबसूरत जलप्रपात है चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित है। चित्रकोट जलप्रपात की ऊंचाई 90 फीट है। बारिश के मौसम में  चित्रकोट जलप्रपात रक्त लालिमा लिए होता है, तो ग्रीष्म ऋतू की रात में सफ़ेद रंग का दिखाई देता है। चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा , चौड़ा और ज्यादा मात्रा में जल प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है, बारिश के मौसम में इस जलप्रपात की चौड़ाई लगभग 150 मीटर होती है ।

    chitrakot

    डोंगरगढ़

    डोंगरगढ़ एक धार्मिक पयर्टन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, डोंगरगढ़ में माँ बमलेश्वरी मंदिर की प्रतिष्ठा देश-विदेश तक है। माँ बमलेश्वरी मंदिर विशाल पर्वत पर स्थापित है। मंदिर में जाने के लिए पहाड़ो पर बनी 1000 से ज्यादा सीढिया चढ़नी पड़ती है। ये मंदिर बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है मंदिर के आस-पास बहुत ही मनोहर द्श्य देखने मिलता है। "डोंगर" का अर्थ "पहाड़" और "गढ़" का अर्थ "दुर्ग" होता है, अर्थात नगर के नाम का अर्थ "पहाड़ पर दुर्ग" है। डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य में राजनांदगांव जिले का एक शहर और नगर पालिका है तथा माँ बांम्बलेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है । राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी का इतिहास काफी पुराना है। 

    इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान  

    छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है, ये उद्यान इंद्रावती नदी के पास होने के कारण  इसका नाम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान पड़ा। इस उद्यान की स्थापना सन- 1978 में हुई इसका क्षेत्रफल 2799.08 वर्ग किलोमीटर है। राज्य सरकार द्वारा टाइगर रिजेर्व 2009 में लागु किया गया। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ के बेहतरीन और सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव उद्यान हैं। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को कुटरू राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है। पार्क अपनी अनूठी और विविध वन्यजीव और पक्षी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों जैसे जंगली भैंसा और पहाड़ी पक्षी भी शामिल हैं।

    भोरमदेव मंदिर 

     भोरमदेव छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले में कवर्धा से 18 कि.मी. दूर तथा रायपुर से 125 कि.मी. दूर चौरागाँव में एक हजार वर्ष पुराना मंदिर है। छत्तीसगढ़ का खजुराहो यानी कवर्धा में स्थित भोरमदेव मंदिर। मंदिर के चारो ओर मैकल पर्वतसमूह है जिनके मध्य हरी भरी घाटी में यह मंदिर है। मंदिर के सामने एक सुंदर तालाब भी है। ऐसा कहा जाता है कि गोड राजाओं के देवता भोरमदेव थे और वे भगवान शिव के उपासक थे। शिवजी का ही एक नाम भोरमदेव है। इसके कारण मंदिर का नाम भोरमदेव पड़ा। नागर शैली में बना हुआ मंदिर पांच फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थित है। मंडप की लंबाई 60 फीट और चौड़ाई 40 फीट है। मंडप के बीच में 4 खंबे है और किनारे की ओर 12 खंबे हैं। मंडप में लक्ष्मी, विष्णु और गरूड़ की मूर्ति रखी है। गर्भगृह में पंचमुखी नाग की मूर्ति, नृत्य करते गणेश जी और मंदिर के चारों ओर बाहरी दीवारों पर भगवान विष्णु, शिव, चामुंडा की मूर्तियां लगी हैं।

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की राजधानी 'रायपुर' है। रायपुर छत्तीसगढ़ का सुबसे बड़ा शहर होने के साथ - साथ यहाँ पर कई बड़े औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है। रायपुर का प्राचीन नाम सतयुग में कनकपुर, त्रेतायुग में हाटकपुर , द्वापरयुग में कंचनपुर और अब कलयुग में इसका नाम रायपुर पड़ा। रायपुर में बहुत अच्छे अच्छे मार्किट है, रायपुर भारत के आकर्षित देशो में से एक है। रायपुर में घुमने के बहुत सारे स्थान है।

    हम आशा करते है की ऊपर दी गयी  जानकरी आपके काम आयगी।

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